छोटी सी तो है जिंदगी जी लेने दो…

मेरे मन को कुचलने वालो आज भी मेरे मन के कोने में वो अल्हड़ सी लड़की जिंदा है जो आज भी तेज बारिश में दौड़ कर छत की ओर भागती है , और दोनों हाथ फैलाकर वैसे ही घूमती है जैसे बचपन मे घूमती थी … छोटी सी तो है जिंदगी जी भर के जी लेने दो …

आज मुझे सुबह उठ कर रसोई में जाना नही , बल्कि घर के बाकी लोगो की तरह अखबार पड़ना पसन्द है पर वो अखबार मुझ तक सबसे देर में पहुँचता है ….क्योंकि सुबह नाश्ते की जिम्मेदारी सिर्फ मुझपर जो है….

मेरी वो खिलखिलाती हंसी जो छीन ली सबने मिलकर न अब मेरा जी भरकर ठहाके लगाकर हंसने को मन करता है , पर तुम लोगो को वो भी नही पसंद ….

छोटी सी तो है जी भर कर जी लेने दो …

तुम मेरी माँ नही हो …

तुम मेरी माँ नही हो जो मेरा दर्द समझोगी , तुम तो शायद एक औरत की तरह भी समझना नही चाहती कि मेरे दिल मे क्या रहा क्या रहता है …

मैने शादी एक इंसान से की थी , जिसकी आत्मा तो कभी थी ही , मैंने शादी तुमसे या तुम्हारे परिवार से नही की थी , तुम मेरा दर्द क्या समझोगी …

तुमने तो जीवन भर अपने कमाऊ पति के पैसों पर राज किया , तुम्हारी ख्वाहिशें तो हमेशा पूरी होती रही , तुम्हे उदास देखकर आज भी तुम्हारा पति तुमसे पूछता है क्या हुआ ? तुम्हारा इलाज तो आज भी तुम्हारा पति ही करवाता है … कभी तुमने अपने ससुर की पेंशन मिलने का इंतजार नही किया होगा, जब रात में पथरी का दर्द उठता होगा तो ससुर के साथ नही जाना पड़ा होगा पति ही लेकर जाता है आज भी …

फिर कैसे तुम ये सोच सकती हो की मैं तुम्हारे नाक़ाम बेटे से नफरत न करू , कभी तरसना पड़ा हो पति के द्वारा किये कामो के लिए तो जानो कैसे एक नॉर्मल पत्नी की तरह जीवन गुजारूं …

कभी खुद को रख कर देखना मेरी जगह , पर तुम रख नही पाओगी खुद को मेरी जगह , मेरी माँ होती तो जान पाती ….

तुम मेरी माँ नही हो ना….

हे ईश्वर मुझे आत्म शांति दीजिए उन चीज़ों को स्वीकार करने की,

जिन्हें मैं बदल नही सकती हिम्मत दीजिये उन चीज़ों को बदलने की,

जिन्हें मैं बदल सकती हूं और सदबुद्धि दीजिये इन दोनों में अंतर जानने का …

इस प्रार्थना की शक्ति को मैं अच्छे से जान गई हूँ और पहचान गई हूँ उसकी ताकत को ,

वो जो विराजमान है , हर एक कण कण में जो मिलता नही मूर्तियों में , मिलता नही किसी मंदिर , गिरिजाघर , शिवालयों में वो तो हर कण कण में हर पल विराजमान है , मुझमे तुममें हर बच्चे में , हर मुस्कुराहट में , हर दुःख में हर सुख में …..

बस इतना माँगती हूँ ईश्वर आपसे मुझे मेरे पूर्व में और अभी भी पल पल किये गए दोषों के लिए क्षमा करिए , और हर उस आत्मा को जिसको मैने दुःख दिया हो ,

उन सब कृत्यों के लिए मुझे क्षमा क्षमा कीजिये , और मेरे जीवन को सही मार्ग पर लिए प्रभु ….

यही विनती है यही प्रार्थना है आपसे 🙏….

अकेलापन

हर वक्त अकेले रहना , हर काम अकेले करना , बच्चे को अकेले ही मैनेज करना , उसकी पढ़ाई ,खाना पीना , बीमारी , सब कुछ अकेले ही करना , ये अकेलापन बहुत खलता है। बहुत मुश्किल होता जा रहा है एकाकी जीवन या फिर ऐसा जीवन जिसमे जीवन साथी तो है पर उसका होना न के बराबर है।
मुझे भी प्यार चाहिए , एक ऐसा विश्वास चाहिए जिसमें ये फिक्र न हो कि मैं नही हूँ तो मेरे पीछे से बच्चा सुरक्षित है मुझे सिर्फ एक दिन के लिए उसकी फिक्र न हो , कभी तो प्यार से बैठ के मेरे साथ कभी खाना खाने में मेरा जीवनसाथी मेरा साथ देता, कभी तो कहीं घुमाने ले कर जाता , क्यों नही हम लोग एक नॉर्मल परिवार की तरह साथ घूमते ,खाते या सोते हैं , अगर ये सब नही होना था तो ये शादीशुदा जीवन ही क्यों मिला ?
क्यों नही आज मैं खुलकर हँस पाती हुँ , क्यों नही खुलकर गा पाती हूँ , क्यों हर वक्त एक बंधन में बंधी मैं roma ईश्वर को खोज कर हर वक़्त इन्ही सवालों के जवाब ढूंढ़ती मैं ……😢

मैं भी ईश्वर की संतान हूँ शायद!

क्या मुझे प्यार पाने का अधिकार नही है?

क्या मैं ईश्वर की संतान नही हूँ?

मैं क्योँ हर बार अपने जीवन में समझौता करू कभी बाप कभी भाई कभी पति के नाम पर , क्या मैं प्यार पाने के लायक नही हूँ, क्या मेरा हक नही बनता के मुझे कोई सरप्राइज दे कहि घुमाने ले जाये जब से होश संभाला है खुद ही खुद को घुमा रही हूं, खुद ही खुद को खिलाने के लिए रेस्टोरेंट ले जाती हूँ, खुद ही खुद के कपड़े ख़रीदती हूँ ….

पर खाना सबके लिए बनाती हूँ, सबके बाद में सोने जाती हूँ , सबके पहले उठती हूँ , जिंदगी में लोगों से उधार लिया हो जैसे ऐसे कर्ज़े चुका रही हूँ ….

बहुत कुछ दुःख भरे हैं मेरे भीतर कोई सुनने वाला न मिला , जो मिला वो ज्यादा रहा नही , दुःख इतने तो नही की संभाले न जा सके , पर इतने कम भी न सही की भुलाये जा सके….

बहुत हुई ये जिंदगी प्रभु और न देना देना तो इतना संघर्ष न देना, ये जीवन तो भरपूर हुआ अबके देना तो थोड़ा प्यार देना ईश्वर….

थोड़ा सा प्यार पाने का हक तो मेरा भी था ना ईश्वर 🙏

झूठे पिया

तुम खुद को मुझसे तो छुपा सकते हो ,खुद से कैसे छुपाओगे.. एक न एक दिन तो खुद को आईने में देख पाओगे , मन का वो आईना जिसमे खुद से झूठ न बोल पाओगे … एक न एक दिन तो खुद को आईने में देख पाओगे तुम तुम्हारे सामने जब तुम्हारा ही अक्स आएगा जब तब क्या खुद से भी झूठ बोल पाओगे तुम..

मुझसे तो बहुत झूठ बोला , पर अब सच न कह पाओगे तुम मुझे तो यही लगता है झूठे हो तुम झूठे ही रह जाओगे तुम … जब से मिले हो झूठ ही बोलते हो तुम हाँ सनम झूठे हो झूठे ही रह जाओगे तुम

#बसएकख्याल

तालाबंदी

आज तुम क़ैद हुए हो घर मे तो छटपटा रहे हो , औरत के दिल से पूछ कर देखो कैसे गुज़री है ये तालाबंदी जीवन भर की , जिस घर मे जन्म लिया वो घर छुड़वा दिया जाता है , वो तालाबंदी , दूसरे घर मे आकर दुनिया भर के नियमों की तालाबंदी , जोर से हंसने पर पाबंदी , देर तक सोने पर पाबंदी , छुट्टियों सब आराम करते हैं और एक औरत ही काम मे लगी रहती है , खुद अपने माँ बाप से मिलने की तालाबंदी … अब शायद कुछ लोग कुछ सीख जाएं , कुछ भावनाएं समझ में आयें…

काग़ज़

मेरी चीखती हुई आवाज़ का बस एक साथी है।

एक वो पन्ना जिसपर अपने दिल की बातें लिखने की आदत कब शुरू हुई पता नही , पर कब ये आदत बढ़ती हुई , उम्र में मेरा साथी बन गया ये ‘काग़ज़’

उस बढ़ती हुई उम्र में कुछ शेर शायरी लिखने की आदत , फिर दोस्तों के नाम ख़त लिखना , फिर अपने नाम के साथ अपने प्यार का नाम उसको लिखने की जगह यही काग़ज़ ही तो था।

अब भी दिल की बातों का पिटारा भी यहीं खाली होता है। कहाँ इसी ‘काग़ज़’ पर और कहाँ। मेरे दिल का साथी यही तो है। जिस पर जितना चाहो चीख लो पुकार लो पर ये मेरी सब बातें अपने तक ही रखता है।

यही ‘ कागज़ ‘

माँ की पुण्यतिथि

14 साल होने को हैं

माँ तुमको खोये हुए मगर यादें जैसे आज भी

मन मे वैसे ही ताजा हैं जैसे हर एक पल तुम मेरे पास

ही हो , खोने का एहसास सिर्फ तब होता है जब तुम

बात नही करती मेरे पास नही ,

तुम्हारे साथ का वो आख़िरी दिन आज भी ज़हन में

जिन्दा है जैसे तुम मुझमें बाकी हो ,

वो काला दिन जिंदगी का कभी पल भर को नही

भूलता ,

जब तुम मुझे छोड़ कर चल दी ,

पल भर में साथ थी पल भर तुमने देह त्याग दिया ,

कभी भी वो कमी पूरी नही हुई माँ ,

इसीलिए कहते हैं एक बच्चे की भगवान उसकी माँ

होती है माँ वो एक दुनिया है जिसकी पूर्ति संसार मे

कोई नही कर सकता खुद भी माँ हूँ ।

पर तुम्हारी कमी बहुत खलती है माँ…..

हमेशा हमेशा मेरी यादों में माँ ….

यादों की दस्तक…

ग़ुलाबी ये ठंड की दस्तक हुई है जैसे ही ,

तेरी याद और ताज़ा हुई है वैसे ही ,

सपनों में तेरा कब्ज़ा आज भी जायज़ है जैसे ही ,

गुलाबी इस धूप की छाँव मे तेरा साथ क़ायम है वैसे

ही , क्यूँ मुश्किल है भुलाना तुझे ऐसे ही ,

साथ तेरा एक क़ायनात था जैसे कोई ,

मन्दिर में बाँधा वो धागा याद अब भी है ,

तेरे झूठे वादों का साथ अब भी है ,

वो मेरी दुनिया वो क़ायनात मेरी तू आज भी है ,

जिस्म अलग होते होंगे ,

तुझसे किया हुआ वो प्यार आज भी उतना ही है ,

मुश्किल है भुलाना तुझे , आसान तुझे याद करना

आज भी है,

रूपट्टे में बंधी वो गाँठ आज भी है ,

झूठी होगी ये दुनिया सच्चा तू उतना आज भी है …

कल सपने में जो तुझे देखा , वो अपनापन आज भी है …

#बसएकखयाल

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